兵临城下
क्या कोयलांचल की धरती अब जानलेवा बन गई है? धमाके के साथ फटी जमीन, समा गई महिला_我的网站

一 | जागरण संवाददाता, धनबाद (केंदुआ)। वो बुधवार की सुबह थी, जब गोधर मोड़ पर रहने वाले सोनू सिंह के घर के बाहर सबकुछ सामान्य था। अचानक एक तेज धमाका हुआ और जमीन ने अपना एक हिस्सा खोल दिया।,इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता घर की सदस्य अंजू देवी, जो कपड़े सुखाने बाहर निकली थीं, उसमें गिर गईं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गोधर मोड़ के निकट धनबाद-बोकारो मार्ग के समीप रहने वाले सोनू सिंह के घर के दरवाजे पर बुधवार की सुबह अचानक तेज आवाज के साथ गोफ बन गया। उस समय वहां सोनू की बहन थी, जो उसमें समा गई। यह देख कोहराम मच गया।,स्वजन का शोरगुल सुन आसपास के लोग दौड़े। सभी ने मशक्कत के बाद अंजू देवी को गोफ से बाहर निकाल कर उनकी जान बचाई। सूचना पाकर विधायक राज सिन्हा मौके पर पहुंचे। पीड़ित परिवार को सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए बीसीसीएल के अधिकारियों से बातचीत की।,
रक्षाबंधन पर मायके आई थी बहन
इस घटना से स्थानीय लोगों में भय है। दरअसल, अंजू देवी रक्षाबंधन पर अपने मायके आईं थीं। कपड़े सुखाने के लिए घर से बाहर निकलीं थीं, तभी अचानक गोफ बन गया। वह संभल भी नहीं सकीं, उसकी चपेट में आ गईं। तभी उनके घर दूध देने के लिए मनोज यादव पहुंचे थे। उन्होंने शोर मचाया व जानकारी सोनू सिंह के पिता देवराज सिंह को दी।
सीढ़ी के सहारे बाहर निकाला
सोनू के भांजे साहिल सिंह ने तुरंत बांस और सीढ़ी की व्यवस्था। आसपास के लोग तब तक आ गए थे। सभी ने उनको सीढ़ी के सहारे बाहर निकाला। सोनू के भाई मनोज ने बताया कि उनका घर रैयती जमीन पर है।,अंजू देवी का कहना है कि अचानक गोफ में गिरने पर उन्हें कुछ समझ में नहीं आया। वे अंदर ही बैठ गईं। गोफ के अंदर गैस नहीं थी, इसलिए जान बच गई। अधिकारियों ने कराई गोफ की घेराबंदी कुसुंडा एरिया के अधिकारी और केंदुआडीह थाने की पुलिस मौके पर पहुंची।,बीसीसीएल अधिकारियों ने घटना की जानकारी ली, गोफ की घेराबंदी करा दी। पीड़ित परिवार को सुरक्षित स्थान पर बसाने की उन्होंने बात कही गई है। भाजपा नेता राजेश गुप्ता और विजय हलवाई ने बताया कि सोनू सिंह के घर के पास पुराना हवा चानक और बालू बैंकर था। बाद में बैंकर बंद हो गया, लेकिन इसकी ठीक से भराई नहीं होने के कारण यह घटना घटी।,यह कोई पहला मौका नहीं है, जब झरिया के कोयलांचल में जमीन धंसने की ऐसी घटना हुई हो। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बंद हो चुके खदानों व आसपास एरिया में बालू बैंकरों की सही भराई नहीं होने से ऐसी दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रशासन ने गोफ की घेराबंदी कर दी है, पर लोगों के मन में डर है कि क्या अगली बारी उनकी हो सकती है?。
राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश में बरसात के बाद अब सड़कों में नए सिरे से ब्लैक स्पाट, अतिसंवेदनशील दुर्घटना संभावित स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा। इन स्थलों के चिह्नीकरण के लिए परिवहन विभाग ने मानक तय किए हैं। इन्हीं के आधार पर सड़कों को संवेदनशील से लेकर अतिसंवेदनशील की श्रेणी में लिया जाएगा। इस संबंध में परिवहन मुख्यालय ने सभी जिलों को पत्र भेजकर इन मानकों के अनुसार बरसात बाद सर्वे करने को कहा है। प्रदेश में इस बार भारी वर्षा से मैदानी व पर्वतीय इलाकों में काफी नुकसान हुआ है। पर्वतीय मार्गों पर तो कई स्थानों पर सड़कें बह गई हैं। इस कारण मार्ग अभी भी बंद हैं। जिन स्थानों पर लगातार भूस्खलन हो रहा है, वे संवेदनशील दुर्घटना संभावित स्थलों के रूप में सामने आए हैं।,प्रदेश में मानसून से पहले तक 174 ब्लैक स्पाट, दुर्घटना के लिहाज से 600 से अधिक अतिसंवेदनशील क्षेत्र और 2500 से अधिक संवेदनशील चिह्नित किए गए हैं। इनको ठीक करने का सिलसिला लगातार जारी है। हलांकि, मानसून के चलते इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी होना तय माना जा रहा है।,अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह का कहना है कि सड़कों में संवेदनशील और अति संवेदनशील दुर्घटना संभावित स्थलों का नए मानकों के हिसाब से चिह्नीकरण किया जाना है। ये मानक सड़क सुरक्षा समिति की लीड एजेंसी द्वारा बनाए गए हैं। बरसात के बाद सभी जिलों को इन मानकों के अनुसार सड़कों में दुर्घटना संभावित स्थलों का चिह्नीकरण करने को कहा गया है।
क्या होता है ब्लैक स्पाट
ब्लैक स्पाट ऐसे स्थान को कहते हैं जहां एक वर्ष में 500 मीटर के दायरे में पांच से अधिक दुर्घटनाएं अथवा 10 से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हुई है।
क्या हैं संवेदनशील व अतिसंवेदनशील क्षेत्र के मानक
नए मानकों के अनुसार सड़क में दृष्यता, तीव्र मोड़, चौड़ाई, ढलान और बेरिकेडिंग की स्थिति के हिसाब से संवेदनशील व अतिसंवेदनशील क्षेत्रों का चिह्नीकरण किया जाएगा।。
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Published on:13:33:56